Education

आरटीई के नए नियम से गरीब बच्चों का दाखिला कराने में अभिभावक परेशान, कई मोहल्लों में स्कूल नहीं, 5500 सीटें अब भी खाली

 

पहले चरण की लॉटरी में 494 सीटें भरीं, बड़े स्कूल पहले ही फुल; पात्रता को लेकर भटक रहे गार्जियन

 महराजगंज टाइम्स ब्यूरो: जिले में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के नए नियम से निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का दाखिला कराने में अभिभावकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। संशोधित नियम के मुताबिक उसी विद्यालय में दाखिला होगा जो छात्र में मोहल्ले में होगा। स्थिति यह है कि कई मोहल्लों में नजदीकी स्कूल न होने और पात्रता शर्तों की जटिलता के कारण बड़ी संख्या में बच्चे आवेदन से वंचित रह गए हैं। जिले में आरटीई के तहत कुल 836 स्कूलों में प्रवेश की व्यवस्था की गई है। पहले चरण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें 494 सीटें भर चुकी हैं। हालांकि अभी भी करीब 5500 सीटें खाली पड़ी हैं, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि जिन बड़े और नामी स्कूलों में वे अपने बच्चों का दाखिला कराना चाहते थे, वे पहले ही चरण में फुल हो चुके हैं। कई अभिभावक पात्रता मानकों को लेकर असमंजस में हैं। आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की शर्तें पूरी न होने के कारण कई बच्चों का आवेदन स्वीकृत नहीं हो पाया। इसके चलते गार्जियन बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कुछ मोहल्लों में आरटीई के तहत सूचीबद्ध स्कूल ही नहीं हैं, जिससे अभिभावकों को दूर के स्कूलों का चयन करना पड़ रहा है। परिवहन और दूरी भी उनके लिए बड़ी समस्या बन रही है। अब तक केवल पहले चरण की लॉटरी संपन्न हुई है, जबकि दो चरण अभी बाकी हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शेष चरणों में खाली सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया जारी रहेगी और अधिक से अधिक पात्र बच्चों को लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बावजूद अभिभावकों की चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी नहीं बनाया गया तो कई जरूरतमंद बच्चे आरटीई के लाभ से वंचित रह जाएंगे।

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